साहित्य

लघुकथाएं

     डॉ. नीना छिब्बर


 
     गुणीराम। 01

    कक्षा आठवी का पहला दिन कक्षाध्यापक रोहित ने
पूरी कक्षा पर गहरी नजर ड़ाली। पहली पंक्ति के आखरी बैंच पर बैठे एक छात्र पर नजरे रुक गयी। तेल से चुपड़े बाल, बड़ी -बड़ी आँखें, कान तक खिची मुस्कान ,उत्साही भाव नाम धूलीराम। एक सप्ताह के अंदर ही चाक-डस्टर, श्याम पट की सफाई, सभी अध्यापकों के लिए दौड़ -दौड़ कर काम करना , कक्षा व्यवस्था, प्रार्थना में अनुशासन रखते हुए वो प्रसन्न होता था।  अध्यापक की अनुपस्थिति में भी कक्षा को शांत रखने का हुनर था उसमें पर पढ़ाई में औसत था। फेल किसी विषय में नहीं होता।
    खेल के मैदान में फुटबॉल की किक शानदार मारता।
उसकी विनम्रता और कामों को करने की तत्परता ने उसे जल्द ही धुलीराम से गुणीराम बना दिया।    
   अपने मित्रों से हमेशा कहता मैं पढ़ाई में सर्वश्रेष्ठ नहीं हूँ पर खेल में उच्च स्थान पाना चाहता हूँ और पाकर रहूँगा। अध्यापक भी इस हीरे को तराशने में लग गये  ।  
    मौलिक, स्वरचित और अप्रकाशित है।
    
        02 अच्छे ..बुरे अंक
    ..जोधपुरसमाचार पत्रों की मुख्य सुर्खियाँ दसवी का नतीजा था। मानव शर्मा का मेरिट लिस्ट में तीसरा स्थान था।  समाचार पत्र के संवाददाता साक्षात्कार लेने घर पहुँचे  तो माहौल में मिठास और उल्लहास बिखरा हुआ था। मानव अपनी अंक तालिका देखकर अति उत्साहित था। सामाजिक विज्ञान के आगे जो डी लगा था वो उसकी आँखों में चमक ला रहा था वहीं दूसरी और पिता विज्ञान और गणित के अंको के अलावा कुछ देख ही नहीं पा रहे थे। जैसे ही संवाददाता ने मानव से पूछा कि ग्यारहवीं में कौन से विषय लेना चाहेंगे ? मानव बोले उससे पूर्व ही  पिता बोले, इतने अच्छे अंक हैं तो विज्ञान लेकर डाक्टर बनेगा यह  ।  मानव की आँखो में पनीली लहर थम गई।
पिता मुखर ,पुत्र आज्ञाकारी बन कर हाँ में हाँ मिलाता रहा।  सब के जाने के बाद पिता ने  मानव के हाथ से  अंकतालिका ली तो सा.विज्ञान के आगे स्माईली बनी थी।  मानव ने सहमते हुए कहा कि मैं तो कला वर्ग में इतिहास ,संस्कृत और अँग्रेंजी  लेकर इतिहास वेता बनना चाहता हूँ । पौराणिक ग्रंथों में लिखे श्लोकों और सुक्तियों का  वैज्ञानिक और तथ्यात्मक विश्लेषण कर अपना  और देश का नाम ऊँचा करना चाहता हूँ ।  पर पिता उसकी आकांक्षाओं के पर कतरने पर आमादा थे। आज मानव को अच्छे अंक आने पर दुख हो रहा था।
   
03   स्माईली
    
दूसरी कक्षा के अमन के चेहरे पर आज बड़ी सी स्माईली दिख रही थी।  घर पहुँचते ही सबसे पहले माँ को अँग्रेंजी  की नोटबुक दिखाते हुए कूदने लगा। देखो आज मुझे भी एक स्माईली दी है मैम ने। माँ ने देखा दस में से चार सही वर्तनी थी और स्माईली के साथ गुड भी लिखा था। अमन ने कहा ,माँ अब मैं जीरो नहीं हूँ । देखना अगली बार बड़ा स्टार भी लाऊँगा। अब मुझे कोई भी कक्षा में चिढ़ाएगा नहीं।  माँ ने पिछले पन्ने पलटे और दस में से एक या आधा अंक लाने वाला आज चार लाया है यह उसकी और अध्यापिका की जीत की तैयारी थी।  मैं आप को  पैरेंट टीचर मीटिंग में   मेरी सोना मैम से मिलवाऊँगा ।उन्होंने कहा कि वो मेरे लिए स्टार वाले बड़े स्टीकर लायेंगी। बस थोड़ा ध्यान से और बिना घबराए काम करना है।  बस अब जल्दी से खाना ,फिर गृहकार्य करना है । माँ अगली परीक्षा के लिए पढ़ना है। सारी नोटबुक्स स्माईली और स्टार से भर दूँगा। अमन के चेहरे की चमक बता रही थी कि पढ़ाई अब उसे बोझ नहीं लग रहीं थी।

   यह तीनों लघुकथाएँ मौलिक और स्वरचित हैं ।
    परिचय.. ड़ा नीना छिब्बर
              सेवानिवृत्त अंग्रेजी व्याख्याता
              स्वतंत्र लेखन..विधा..कविता, लघुकथा ,बाल कविता ,हाइकु ,पिरामिड , सायली ,समसामयिक लेख . कहानी।
      ड़ा.नीना छिब्बर
..  17/653
      चौपासनी हाऊसिंग बोर्ड़
      जोधपुर.342008

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