कवितासाहित्य

लाल किला

__डॉ पंकजवासिनी

शाहजहां से सृजित इमारत, लाल किला है इसका नाम।
लाल लगे हैं पत्थर मनहर , विश्व धरोहर में पहचान।।

शोभित कालिंदी के तट पर , पाता गुरु संस्कृति की सींच।
बहती शुभ यमुना की धारा , रंगमहल के बीचोबीच ।।

मुगल वैभव की यह निशानी ,अनूठे शिल्प की है शान।
कहे मुगल की गौरव गाथा, विश्व करे इसका गुणगान।।

प्रतीक मुगल अंतिम सत्ता का ,बहादुर जफर अंतिम आन ।
मुक्ति की लहर बही यहीं से, गाया मुक्ति का प्रथम गान।।

आजादी के परवानों का , करके नेतृत्व जफर शाह ।
मुक्ति संघर्ष में इस किला की , मिली भारतीयों को छांह।।

डॉ पंकजवासिनी
असिस्टेंट प्रोफेसर

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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