साहित्य

लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल

गीता पांडे अपराजिता

हे लौह पुरुष मै करती हूंँ शत-शत सदैव तेरा वंदन।
झावेरभाई की चौथ संतान सबके उर के नंदन।
मेहनत से तप करके ही तुम चमके हो जैसे कुंदन ।
जग सारा कर रहा तुम्हारा दिल से आज है अभिनंदन।

नाडियाद में जन्म लिया इंग्लैंड वकालत की पढ़ाई।
दीन दुखी पिछड़े वर्ग की जीवन भर तुम लड़े लड़ाई।
नेतृत्व क्षमता से अंग्रेजी सत्ता को दिए झुकाई।
सम्मान किसानों का बढ़ा जनता के तुम सदा सहाई।

प्रथम उप प्रधानमंत्री गृहमंत्री बनकर मान बढ़ाया ।
राष्ट्र विरोधी तत्व को मिटा राष्ट्रवाद परचम फहराया।
एकीकृतकर भारत कोअसंभव कार्य कोकर दिखाया।
बारदोली आंदोलन सफल कर सरदार उपनाम पाया ।

देश सेवा संग जनसेवा से नहीं कभी मलीन हुए।
दूरदर्शी देशभक्त भारत अखंडता तल्लीन हुए।
पंद्रह सितंबर उन्नीस सौ पचास चिर निद्रा लीन हुए ।
अखंड राष्ट्र जनक मरणोपरांत भारत रत्न असीन हुए ।

स्वरचित मौलिक व अप्रकाशित रचना
गीता पांडे अपराजिता रायबरेली उत्तर प्रदेश 9415 71 8838

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