कवितासाहित्य

वरदान

बिमल काका गोलछा “हँसमुख”

थके थके से ये कदम,
गिरे होगे कितनी बार।
अनगिनत ठोकरे लगी,
अनदेखी की कई बार।।

संभल जाता हूं हरबार,
ये मुझे थका नहीं पाई।
उम्र के इस पड़ाव पर,
मुख पे शिकन ना आई।।

आज भी जज्बा रखे हूं,
जितने की जिद्द रखे हूं।
परिस्थिति हरा ना सके,
मन में विश्वास रखे हूं।।

दुविधा को देखकर ही,
“हँसमुख” खोजे निदान।
समस्याएं सुलझती है,
स्वयं बनती है वरदान।।

बिमल काका गोलछा “हँसमुख”
श्रीडूंगरगढ़ (बीकानेर) राजस्थान

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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