साहित्य

वाणी वंदना


मीना जैन

माँ सरस्वती वरदान दो!
अज्ञान हर हमें ज्ञान दो!:::

चरणों में तेरे वंदन करते
हर पल तेरा सुमिरन करते
वीणाधारिणी! माँ कल्याणी!
नव चेतना, नव प्राण दो!
माँ सरस्वती वरदान दो!:::

वरद हस्त हो जिस पर तेरा
मिट जाए जग भ्रमण का फेरा
सुधामूर्ति माँ गुणशालिनी!
मधु कंठ में मधु गान दो!
माँ सरस्वती वरदान दो!:::

दूर करो माँ गहन अंधेरा
भवसागर भय मेटो मेरा
गूंजे जग में वीणालहरी
शरणागत माँ! अभयदान दो!
माँ सरस्वती वरदान दो!:::

स्वरचित, अप्रकाशित रचना।
✍️मीना जैन
गाजियाबाद।

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