गजलसाहित्य

वादो से जिया करता हूं

__कैलाश चंद साहू

मैं तो महबूब के वादो से जिया करता हूं
बन संवर के संग होठों से पिया करता हूं।।

मुहब्बत में सनम जीना हुआ मुश्किल
देखकर यार की आंखों में पिया करता हूं।।

तेरी मस्त मस्त अदाओं का हूं कातिल
जिस्म के हर कतरे रोज सिया करता हूं।।

जीना मरना तेरे ही संग यार मेरे अब
भीगी ग़ज़ल ख्वाबों में गाया करता हूं।।

रात दिल आहे भरकर जीना नहीं गवारा
तेरे एहसासों के संग यार जिया करता हूं।।

जब कभी उसकी सूरत को देखता हूं मैं
प्यार भरी निगाहों से छू लिया करता हूं।।

मुझे किसी दवा दारू की नहीं जरूरत
संभाला देख मयकशी पिया करता हूं।।

मेरे महबूब के होठो में है मयकशी नशा
आनंद महबूब की मस्ती जिया करता हूं।।

कैलाश चंद साहू
बूंदी राजस्थान

100% LikesVS
0% Dislikes

Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Check Also
Close
Back to top button
error: Content is protected !!