साहित्य

विश्व धरा दिवस

मणि बेन द्विवेदी

ऋषि मुनि ने दिल से गाया तेरे ही गुण धरती माता।
पांच तत्व की तू संरक्षक तू ही सबकी जीवन दाता।

कदम पड़ा जिस दिन धरती पर धन्य हुआ ये जीवन।
तेरे ही आंचल के छांव में बड़ी हुई पाई निर्मल मन।

हम सब पर हैं बड़े बड़े धरती माता के ही उपकार।
पंच तत्व का दी है धरती माता ने सबको उपहार।

धरा गगन ने मिल कर हम सबको जीवन का दान दिया।
मात पिता सम मिल कर खुशियां धरा गगन प्रदान किया।

प्रकृति है प्राण प्रदाता अन जल वायु और जीवन दाता।
सबके जीवन की आवश्यकता पूरी करती धरती माता।

सबका भार उठाती धरती जड़ चेतन को धारण करती
जीव जंतु और हर मानव का जीवन खुशियों से भर देती।

धैर्य की अप्रतिम प्रतिमूर्ति है सहनशक्ति को पावन करती
प्रतिपालक बन सब जिओ के धरती मां संरक्षण करती।।

धरती का अब बन्द हो दोहन सबका ये संकल्प होअर्पित।
धरती के अस्तित्व का दोहन नहीं करेंगे कभी भी खंडित।

क्रोधित होगी अगर प्रकृति तो विध्वंशक प्रहार करेगी।
रक्षित होगी धरती माता निज अस्तित्व विस्तार करेगी।

मणि बेन द्विवेदी
वाराणसी उत्तर प्रदेश

100% LikesVS
0% Dislikes

Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button
error: Content is protected !!