साहित्य

वैवाहिक वर्षगांठ की हार्दिक शुभकामनाएं

विवाह की 18 वी वर्षगांठ पर

मेरा हृदय उद्गार

गिरिराज पांडे

इस प्यार भरे जीवन में खुशबू का बसेरा है
हर शाम भी अब तेरी तेरा ही सवेरा है
जिस दिन से मिले हो तुम खुशियां ही छाई हैं
भरकर खुशियां मुझमें जीवन महकाई है
हर दिन अब अपना खुशहाल सा रहता है
साथ न छूटे कभी मेरा दिल यह कहता है
इस प्यार भरे जीवन मे
महसूस करूं जितना मन उतना ही बहलता है
तेरे साथ रहूं तो यह जीवन भी महकता है
संग रहकर तेरे सारे जहां को पाता हूं
खुशियों से भरा जीवन तुझ में ही पाता हूं
इस प्यार भरे जीवन में
जो बाग लगाए थे वह फूले फले हैं अब
मेरे जीवन में आकर मादकता भरे हैं वह
इस आंगन को अपने अब तो चहकाना है
जीवन की बगिया को मिलकर महकाना है
इस प्यार भरे जीवन में
मधुमय सी बातों को दिन रात जो करते हैं
खुशियां मिलती उससे मिश्री सी घुलती है
ये बात भी तेरी है यह भाव भी तेरा है
यह राग भी अब तेरी ए साज भी तेरा है
इस प्यार भरे जीवन में
पलकों में बिठा कर के दिन रात मै रखता हूं
ना कष्ट कभी पहुंचे वह बात मैं करता हूं
भाव में अब तेरे डूबा में रहता हूं
जो भाव यहां मेरा वही भाव भी तेरा है
इस प्यार भरे जीवन में

गिरिराज पांडे
वीर मऊ
प्रतापगढ़़

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