कवितासाहित्य

वो ख्यालात मोहब्बत के

__वीना आडवाणी तन्वी


तेरे तसव्वुर ए ख्यालात में अकसर दिल खोता है
एसा लगे चांदनी रात में चांद चांदनी संग होता है।।

ख्वाबों ख्यालों में गुलज़ार सी तू लगती मुझको
तुझे जी भर के मैं देखूं यही एहसास दिल में होता है ।।

तेरे सुर्ख लबों कि लाली जब मेरे होठों को छुए
ख्यालों में ही सही पर दिल मेरा गुले गुलज़ार होता है।।

वो तेरा सिमट मेरी बांहों में अपना चेहरा छुपाना
तेरे चेहरे के कातिल तील पर दिल बाग-बाग होता है।।

यूं कज़्जरारी आंखों में मुझे देख तेरा पलकें झुकाना
तेरी झुके चेहरे को उठा लबों का टकराना बहार होता है।।

आज ख्यालो में ही सही तू मेरी जिंदगी है कहलाती
देख आंखों में गौर से मेरी तेरी तस्वीर का दीदार होता है।।

क्या उसे भी मेरी तरह मेरा ख्यालों आता होगा
क्या मेरी तरह उसका दिल भी बैचेन बेकरार होता है।।

तेरे तसव्वुर ए ख्यालात में अकसर दिल खोता है
एसा लगे चांदनी रात में चांद चांदनी संग होता है।।2।।

वीना आडवाणी तन्वी
नागपुर, महाराष्ट्


100% LikesVS
0% Dislikes

Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button
error: Content is protected !!