साहित्य

शरद पूर्णिमा की रात

है चँद्रमा सोलह कलाओं से सुसज्जित,
आज आई शरद पूर्णिमा की रात सुरभित,
आज चाँदनी शीतल किरण से है समाहित,
आज आकाश से रात भर बरसेगा अमृत।

श्वेत चाँदनी नदिया के जल में है समर्पित,
यमुना के तट पर गोपियाँ होती प्रफुल्लित,
कृष्ण राधा के महारास में होकर सम्मिलित,
भक्ति और श्रद्धा के कर रही हैं पुष्प अर्पित।

दूरी पृथ्वी की चाँद से हुई है आज सीमित,
होगा धरती को लक्ष्मी माँ से वरदान प्राप्ति,
होने लगे हैं हजारों आकाशदीप प्रज्वलित,
दीपदान की पावन प्रथा सदियों से प्रचलित।

अमृतकलश से देवता छलकाते हैं अमृत,
औषधीय गुण से भरी किरणें भी मिश्रित,
खीर चाँदनी में रखके करें विनती समर्पित,
हर रोग से लड़ने की करे क्षमता विकसित।

नीलम द्विवेदी
रायपुर , छत्तीसगढ़ ।

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