कवितासाहित्य

शिकवा

__बिमल काका गोलछा “हँसमुख”

बिमल काका गोलछा “हँसमुख”

शब्द भले पास हमारे कितने,
जब शब्दों में ना हो रोचकता।
खुश कर ना पाए अपनो को,
उन शब्दों में कैसी नैतिकता।।

रहना जब, अपनो के निकट,
खामोशी को तू अपना लेना।
बुराई का त्याग करके तुम,
दिल पे बात कभी मत लेना।।

वक्त बुरे में यह वक्त तराजू,
सब अपनों को लेता है तौल।
कौन कितने है, गहरे पानी में,
वक्त सबके देता है भेद खोल।।

मुश्किल है समझाना गैरों को,
खुद “हँसमुख” बन समझा लेते।
समझ जाए, खुद को जो खुद,
वो गैरों से शिकवा नहीं करते।।

बिमल काका गोलछा “हँसमुख”
श्रीडूंगरगढ़ (बीकानेर) राजस्थान

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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