साहित्य

शिक्षक दिवस


आओ शिक्षक दिवस मनाए,
गुरु के चरणों में शीश नवाए।
सारे शिक्षकों को हम अपना,
अभिनंदन कर आए।
शिक्षक बिना है घोर अंधेरा,
उनके बिना ना होए उजियारा।
बिन शिक्षक के मान कहां है,
जीवन की पहचान कहां है।
सच्चा गुरु शिक्षक बन ,
जीवन में ज्ञान है भरता ।
वह जीवन का आधार बनता ,
जीवन मार्ग प्रशस्त करता,
जो सिखलाएं वो शिक्षक।
मात- पिता गुरु हमारे चरित्र निर्माता,
भगवान समान होते सारे ।
माता तो शरीर की दाता,
सुंदर संस्कार विधाता ।
पिता उंगली पकड़ चलना सिखाते,
धूप छांव का छाता बन जाते।
शिक्षक की तो बात ही क्या ,
उन्नति मार्ग हमें बताते।
देते हमको ज्ञान सदा ही,
वापस हमसे कुछ नहीं चाहते ।
राष्ट्र का आधार बनाते,
घर परिवार में शान बढाते ।
मंजिल तक हमको पहुंचाते ,
जितना कहूं उतना कम है।
तारीफ में शब्द कम है
शिक्षक होकर राधाकृष्णन,
राष्ट्रपति पद वह पा जाते ।
उनके जन्मदिवस को,
शिक्षक रूप‌में सदा मनाते ।
5 सितंबर को करते ,
शिक्षक समाज का अभिवादन।
जो हमारे जीवन निर्माता,
उनका दिन तो है यह आज ।
नीति सिखाई ज्ञान बताएं,
भले बुरे का भेद बताएं।
गुरु हे तम के नाशक ,
शिक्षकों की गाथा की क्या बात जगत में,
गुरु वशिष्ठ ने दिये जगत को श्री भगवान।
संदीपन गुरु ने दिए जगत को गीता के आधार ।
शिक्षक ही आगे बढ़ाते ,
उत्तम ज्ञान का पाठ पढ़ाते ।
ऐसे शिक्षकों को सदा करती हूं प्रणाम
उनके अभिवादन में शब्द नहीं है मेरे पास।।
रचनाकार ✍️
मधु अरोरा

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