साहित्य

श्रमिक दिवस (1 मई )

चंद्रप्रकाश गुप्त “चंद्र”

सिंहासन ! सरकारों के हिल उठते हैं, श्रम शक्ति की हुंकारों से

पर्वत विशाल भी पल में फट जाते हैं, स्वेद विंदु की बौछारों से

जल थल अंबर सुसज्जित होते, श्रम वीरों के अलौकिक औजारों से

सदैव सृजनशीलता कुसमित होती, श्रमिक निष्ठा के उपकारों से

जग वालों मत करो उपहास हमारा, काल सदा ही हमसे हारा

हम ही अपने श्रम से सुरभित करते, हर ग्राम नगर चौबारा

निर्जन में भी जीवन सुमन खिलाकर, स्वयं के जीवन से कभी न हारा

गिरि,कानन काट बनाये पथ, मोड़ीं अगणित नदियों की धारा

मुझे धनिकों ने धकियाया, जिन पर हमने अपना सारा जीवन वारा

सहता रहा असीमित कष्ट हमेशा, माना अपने जीवन से प्यारा देश हमारा

हमने बनाये पुल बहुमंजिला भवन, अपने स्वेद विंदु गिरा गिरा कर

मंदिर मस्जिद चर्च गुरुद्वारा, हमने ही जाये श्रम लगा लगा कर

तुम्हारे सुखों के आशियाने रहते,सदा हमारे शिल्प के मोहताज

श्रमिकों का मत उपहास कर,देखो जरा अपना ही गिरेबान झांक कर

समझ नहीं खिलौना मुझको, मनुजता का कुछ तो ध्यान धर

भारत भव्य बनायें हम सब मिलकर, इस बात का ज्ञान कर

आओ हम सब बनें पुजारी देश के, अपने प्राणों से राष्ट्र का श्रंगार कर

अपने अपने उद्यम श्रम दानों से, गौरवशाली वैभवशाली भारत को छविमान कर

हमारी क्षुद्र वासनाओं का क्षय हो, हमारा चित्त राष्ट्र सृजन में लय हो

मुझमें रहे नहीं तनिक अभिमान, अविराम भारत की हर क्षण जय हो

हम कभी कहीं नहीं प्रभु दीन रहें, सदा स्वतंत्र सत्याधीन रहें हम

श्रम साधना के निभा सकें सब व्रत हम, कर्म करें नहीं किसी से भय हो

भूलना नहीं रक्तिम पग, हाथ फफोले, भूखे उदर की पीड़ा से

धरा हिलेगी गगन झुकेगा, दुःखी हृदय की क्रंदन क्रीड़ा से

सिंहासन ! सरकारों के हिल उठते हैं, श्रम शक्ति की हुंकारों से

पर्वत विशाल भी पल में फट जाते हैं, स्वेद विंदु की बौछारों से

             श्रमेव जयते

         जय श्रमिक,जय भारत

 चंद्रप्रकाश गुप्त "चंद्र"

(ओज कवि एवं राष्ट्रवादी चिंतक)
अहमदाबाद, गुजरात


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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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