कवितासाहित्य

श्री राम के बिना कोई काम कब हुआ

सुषमा श्रीवास्तवा

श्री राम के बिना कोई काम कब हुआ! ×2
1• सुनो रे सुनो! श्री राम जी की नगरी,श्री राम जी का धाम,
चैत्र शुक्ल नवमी को अवतरण हुआ, माँ कौश्ल्या की गोद के लाल बने,
दशरथ को पिता का सौभाग्य मिला,
हरष-हरष पुलकित अयोध्या श्री धाम,
श्री राम के बिना कोई काम कब हुआ!
2• अयोध्या की गली-गली राजत श्री राम,
कनक भवन में सिया संग विराजै श्री राम,
दरश करत सब जन सुख पावै,
बिगरे काज सुधर  सब जो जाएं,
तन हरषे मन शीतल होए,
छलक प्रेम नैनन बहि जाए,
राम नाम विश्वास दिलाए जब राम नाम की गठरी पाई,हुए मनोरथ पूरण सब काम।
श्री राम के बिना कोई काम कब हुआ!
3• चलो रे चलो अयोध्या चलें,
सरयू की बहती धारा में, कल-कल में श्री राम।
अवधपुरी की खुशबू में तुम पाओगे श्री राम ,
जन-जन में श्री राम देखे,दर-दर पर श्री राम।
देख सको तो देख लो भइया,हर उर में बसे श्री राम।
श्री राम बिना कोई काम कब हुआ!
4• राम नाम की नगरी तो यह,है मर्यादा की खान।
अपरम्पार मधुर व्यापार,है मिलन प्रेम की शान।
सिखलाती है नेह की भाषा,मधुरस घोले कानों में।
परम पुनीत पावन यह नगरी,सुन्दरता की मूरत है।
नयन पिपासा बुझा रही,भक्तों का विश्वास है।
कलुषित कषाय पाप मिट जाए,दरश करत श्री धाम के।
श्री राम के बिना कोई काम कब हुआ!
5• स्निग्धता अथाह लुटा रही,कुण्डों की मनोरम छवि देकर।
पावस श्रावण में दिखती,सुषमा इस पावन श्री धाम की।
श्री राम के बिना कोई काम कब हुआ!

रचनाकार- सुषमा श्रीवास्तव, मौलिक रचना, सर्वाधिकार सुरक्षित, अप्रकाशित, रुद्रपुर, उत्तराखंड।

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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