साहित्य

श्रृंगार

राजेश श्रीवास्तव राज़

वहीं मिलूंगा एक दिन तुमको,आ जाना तुम मधुमास प्रिये।
सजल नयन श्र्ंगार सजा हो,वह रूप दिखलाना आज प्रिये॥
आह्लादित कंठ की मधुर तरंगे,वह राग सुनाना आज प्रिये।
भ्रमर कुंज में जब घूम रहे हों,पग नूपुर बांधना आज प्रिये॥
शीतल, मंद समीर चले यहां,कमल ताल हो निजी साथ प्रिये।
निशा प्रहर हो सुरम्य मनोहर,ऐसे पल आना तुम आज प्रिये॥

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13.10.2021

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