कवितासाहित्य

सघन प्रेम

__अलका गुप्ता ‘प्रियदर्शिनी’


करना है तो करना है हमें प्यार तुझी से करना है,
मरना है तो मरना है दिलदार तुझी पर मरना है।

तेरी प्यार भरी नजरें मुझ पर
टिक करके कुछ कह जाती हैं दिल के अंदर यूं घुस कर के
तेरी खुशबू को महकाती हैं
तेरे मन के भावों को महकाकर प्यार की बारिश करना है,
मरना है तो मरना है दिलदार तुझी पर मरना है‌।

तेरे प्यार की खुशबू के खातिर, दिल जान तुझी पर वारूं मैं।
अब तेरी बलैया लेने को,
तेरे दिल के अंदर झांकूं मैं।
तेरे मेरे इस मिलने को स्वीकार सभी को करना है,
मरना है तो मरना है दिलदार तुझी पर मरना है।

एक प्रेम पुष्प दो तन महके,
दो तन महके एक पुष्प खिले।
इन पुष्पों की खातिर दुनिया में, दिल से दिल दोनों के रहे मिले। ‘अलका’ के दिल में प्यार भरा और प्यार तुझी से करना है
मरना है तो मरना है दिलदार तुझी पर मरना है।

करना है तो करना है हमें प्यार तुझी से करना है,
मरना है तो मरना ही दिलदार तुझी पर मरना है।

अलका गुप्ता ‘प्रियदर्शिनी’

लखनऊ उत्तर प्रदेश।

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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