साहित्य

सच्चा स्वराज

डॉ वारिश जैन
गांधी तेरी भारत माता रो पड़ी,
सच्चे स्वराज की बाट जोहते- जोहते।
जाने कब मुस्कुराएगी आम-जन की जिंदगी,
अब तो ऑंसू भी सूख गए रोते-रोते।
जाने कब कटेगी खुशियों की फसल,
जिंदगी गुजर गई मेहनत का बीज बोते-बोते।
जाने कब जीतेंगे हक की लड़ाई,
जमाना बीत गया जनता को अधिकार खोते-खोते।
बस अमीरों ने भर ली अपनी तिजोरीयाँ,
गरीबों की कमर टूट गई महंगाई का बोझ ढ़ोते-ढ़ोते ।
महज साबुन से नहीं चमके सफेद कपड़े,
धोने वालों के हाथ घिस गए मैल धोते-धोते।
सूखा ,बाढ़ ,अकाल, मंहगाई,
नींद भी उड़ गई सुख का ख्वाब संजोते- संजोते।
जाने कब खुलेगी किस्मत आवाम की,
बरसों बीत गए भाग्य सोते-सोते।
जिंदगी की अंतिम परीक्षा हार गया आदमी,
जीवन भर मेहनत से पास होते होते।
डॉ वारिश जैन
इन्दौर मध्य प्रदेश

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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