कवितासाहित्य

सफर


आज एक नन्ही कली
इस दुनिया में आई थी

बाबा के गले से लिपटी वह
मां की गोद में मुसकाई थी

गुजरात समय आज वह नन्ही कली
जग में किशोरी कहलाई आई थी

अब मां बाबा को बिटिया के
ब्याह की चिंता सताई थी

फिर ढूंढ ढांड एक सुंदर वर
बिटिया से हामी भरवाई थी

ओड लाल चुनरी अब वह
घुंघट में घबराई थी

आज नए घर में देखो वह
दुल्हन बन कर आई थी

कभी सास के कहने पर वह
घुंघट में शरमाई थी

तो कभी ननद की ख्वाहिशों पर
बहु भाभी के रूप में आई

भूल कर अपने सपनों को उसने
सारी रीत अपनाई थी

आज फिर एक बेटी ने
अपनी ख्वाहिशों की चिता जलाई थी

Preeti Sharma

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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