साहित्य

सरस्वती राजेश की आत्मवाणी


जसगीत- काबर तैं धरे रूप काली

ममतामयी माता, भगवती भवानी
काबर तैं धरे रूप काली.. ऐहे
काबर तैं धरे रूप काली

लाली -लाली आँखी कइसन तैं छटकारे
लाली -लाली जिभिया कइसन तैं लमाये
देख के लैइका सियान माता सबके जी घबराये
ममतामयी माता, भगवती भवानी
काबर तैं धरे रूप काली.. ऐहे…

कारी देह बना के माता रूप धरे बिकराल
केश घलो झरिहाये माता मुंड के पहिरे माल
कतका जी घबरावत हे तोर देख के अइसन हाल
ममतामयी माता, भगवती भवानी…

आगी कस तोर गुस्सा माता भारी तम-तमवाये
लहू पीये तैं रक्तबीज के रण म नाच कराये
तीसर आँखी खोल के माता भस्म जमो कर जाये
ममतामयी माता, भगवती भवानी
काबर तैं धरे रूप काली ..ऐहे…
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सरस्वती राजेश साहू
चिचिरदा, बिलासपुर (छ. ग.)

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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