कवितासाहित्य

सात घोड़ों वाला देदीप्यमान सूर्य

__रीमा सिन्हा(लखनऊ)

सतरंगी सूर्य को पूजते ऋषि मुनि और देवतागण,
परम सौंदर्य से सुरभित होता मनोहर वातावरण।

ऊर्जा का संचार है होता,कम्पित तन हो जाता उष्म,
दिग दिगन्त को करते रौशन हो विशाल या सूक्ष्म।

रंग बिरंगी प्रकृति भी इनके दम पर चलती है,
प्रकाश से इनके बगिया कुसुमित होती है।

सूर्यदेव के रथ को संभालते हैं घोड़े सात,
हर घोड़ा है निराला,सबकी निराली बात।

गायत्री, भ्राति,उश्निक, जगती,
त्रिस्तप,अनुस्तप,पंक्ति है नाम उनका,
सप्ताह के अलग अलग दिनों को दर्शाते,
जग आलोकित करना है काम उनका।

सूर्य देव नई उषा संग नवजीवन का संचार हैं करते,
पग धरो कर्मपथ पर ये आगाज़ हैं करते।


रीमा सिन्हा(लखनऊ)

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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