साहित्य

सूर्यास्त

सपना कुमारी

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मत कर रे अभिमान मानव
सूर्योदय के बाद सूर्यास्त होना ही है
रूप रंग दौलत शौहरत के पीछे
मत भाग रे मानव एक दिन छोड़कर जाना ही है पतन तेरा होगा रे मानव,
अच्छे कर्म कर रे मानव,
परमात्मा के पास वही जाएगा,
उगते सूरज को हमने डूबते भी देखा है उत्थान के बाद पतन होना ही है
मत कर रे अभिमान रे मानव
तेरा कर्म ही वहां जाएगा
बुजुर्ग जनों की सेवा करना सेवा
प्यासे को पानी पिला देना,
भूखे को अन्न दान देना
वहीं सब तेरा कर्म जाएगा

सपना कुमारी जहानाबाद बिहार

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