साहित्य

स्कंदमाता

परम स्नेहमयी स्कंदमाता!
मन निशि दिन गुण तेरा गाता !!

सकल मनोरथ पूर्ण करतीं!
मातु मोक्ष के द्वार खोलतीं!!

रूप शुभ इनका अति मनोहर!
भक्तजनों हित सदैव तत्पर!!

एक कर में लिए बाल स्कंद!
दो करों में शोभित है कमल!!

शेष कर में धारे मांँ तीर!
रणक्षेत्र में हैं अतुलित वीर!!

मातु ये चारभुजा धारिणी!
पद्मासना ये सिंह वाहिनी!!

स्कंदमाता का सजा दरबार!
आसुरी शक्तियांँ गईं हार!!

आओ मांँ की कर लो पूजा!
कल्याणकारी कौन दूजा!?!

मन में शुभता भरती माता!
तुझसे है माँ हिय का नाता!!

तुझ बिन माता हम हैं अनाथ!
कृपा, आशीष दे : कर सनाथ!!

हम सभी हैं तेरे स्कंद माँ!
सकल विपदा को कर भंग माँ!!

हृदय के सारे क्लेश हर लो!
प्रेम दया का प्रकाश भर दो!!

चरणों में धर शीश नवाएँ…!
भवसागर से झट तर जाएंँ!!

डॉ पंकजवासिनी
असिस्टेंट प्रोफेसर
राम सेवक सिंह महिला महाविद्यालय, सीतामढ़ी

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