कवितासाहित्य

स्मृति की खुशबू

सीताराम पवार
“मां की स्मृति की खुशबू को कोई संतान खो नहीं सकती”
*
स्मृति की खुशबू मेरी मां की अब तक भी मेरे सांस में है

महसूस करता हूं खुशबू को अब तक मेरे विश्वास मे है।

मां की स्मृति की खुशबू ने मेरे जीवन को महकाया है

मां की स्मृति की खुशबू का मुझको भी एहसास है।

जब तक मां की स्मृति की खुशबू मानस पटल पर अंकित है

लगता है इस जीवन में मेरी मां मेरे कहीं आसपास है।

मां की स्मृति की खुशबू जीवन में बहार बनकर आती है

पतझड़ के इस जीवन में यह खुशबू बन जाती मधुमास है।

मां के आंचल में हमने दूध पिया उसकी महक तो लाजमी है

मां की स्मृति की खुशबू से हमारे जीवन में भी उजास है।

मां का आशीष पाकर हमने इस जीवन में खुशियां पाई है

ऐसा लगता है हमारे सर पर आज भी मां का आशीष भरा हाथ है

मां की स्मृति की खुशबू को कोई संतान खो नहीं सकती

जिसने इसको खो दिया फिर जिंदगी यह उसकी उदास है।

सीताराम पवार
उ मा वि धवली
जिला बड़वानी
मध्य प्रदेश
9630603339

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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