साहित्य

स्वर्गीय जगदेव रॉय (परिचय :-5)


ऑल बंगाल ट्रांसपोर्ट फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी, मोटर ट्रांसपोर्ट फेडरेशन ईस्टर्न जोन बंगाल के सचिव सह पश्चिम बंगाल भोजपुरी परिषद के जन्मदाता, असाधारण ब्यक्तित्व के धनी ग्रामीण क्षेत्रीय व सामाजिक परिवेश को सदा एकजुटता की डोर में पिरोने वाले प्रतिभासंपन्न ब्यक्ति की चर्चा आज आपके समक्ष करने जा रहे हैं जिनका समाज के प्रति समर्पण का भाव अनूठा रहा हैं। सोचिए जब गांव बदहाली में रहता था सरकारी योजनायें सतह पर पूर्णतः लागू नहीं होती थी! गांव में कुछ अच्छा करना होता था तो चंदा ही एकमात्र विकल्प था! उस समय सबसे बड़ी बात यह थी कि सभी वर्गों को एक दूसरे पर अटूट विश्वास था। सभी लोग सुख-दुख में एक दूसरे का सहारा बनते थे! एक रुपया से लेकर 10 रुपया तक या यथाशक्ति जिसको जितना श्रद्धा होता उतना चंदा में गांव के विकास के लिए लोग दान देते थे और उस चंदा के पैसे में अपना अंश मिलाकर उससे सतह पर कार्य किया जाता था! सड़के, स्कूलों की ब्यवस्था न के बराबर थीं! लोग थोड़ा सा बारिश हो जाने पर साईकिल कंधो पर उठाकर ले जाते थे! खेती के लिए दियर में पानी सूखने के इंतजार होता था क्योंकि नदी में नाव का अभाव था! तैरकर लोग नदी पार करते थे तथा पशुओं को चारा चराने दियर में जाते थे। वैसे विकट हालातों में कुछ लोग मसीहा बनकर उभरे थे उनमें से एक थे सुंदरपुर बरजा निवासी आदरणीय “स्वर्गीय जगदेव राय जी” जिन्हें प्यार से लोग जगदेव पाण्डेय के नाम से भी पुकारते थे। बंगाल की विरासत अपने पुत्रों के अधीन छोड़कर अपने मातृभूमि के सेवा में तत्पर रहने वाले इस महान हस्ती ने अपने अथक प्रयासों से ब्रह्मपुर शिव जी के पोखरा का जीर्णोद्धार, सुंदरपुर बरजा स्थिति प्राथमिक विद्यालय, मध्य विद्यालय निर्माण व उच्च विद्यालय का भी मार्ग प्रशस्त किये थे परंतु ज़मीनी अड़चनों के कारण उसे झौआ बेलवनिया स्थापित करना पड़ा! बरजा स्थित काली माँ का मंदिर! काली मंदिर से मेन रोड तक जज साहेब की उपस्थिति में अपने जमीन का अधिकतम अंश देकर सड़क निर्माण कार्य(जगदेव पथ) ! प्रेम बाबा मंदिर में सहयोग! मठिया के नव निर्माण में सहयोग व नदी में नाव की ब्यवस्था इत्यादि के विकास व निर्माण कार्यों में सहयोग कर इन्होंने अग्रिम पंक्ति के योद्धा के रूप में प्रतिनिधित्व कर गांव को एक अच्छी दशा व दिशा देने का कार्य किया था तथा उस समय अपने दूरदर्शी प्रयासों से इन्होंने ग्रामवासियों के लिए काली माँ मंदिर के पीछे तक विजली की समुचित ब्यावस्था किया था और इसे पूरे गाँव तक पहुँचाने के लिए 50-50 रुपया चंदा गांव से इक्क्ठा करने की कोशिश की ताकि घर-घर तक इस ब्यवस्था को पहुँचाया जा सके लेकिन अधिकतर लोगों के पास पैसों का अभाव व सक्षम लोगों द्वारा पूर्ण सहयोग नहीं मिलने के कारण विजली गांव के दरवाजे पर ही दस्तक़ देती रह गयी। इन्होंने आगे भी हिम्मत नहीं हारा गांव के ग़रीब लोगों के घर लड़कियों की शादी में अपना सहयोग देते रहें तथा जब तक जिंदा रहे जनहितकारी कार्यों को अंजाम देते रहें आज ऐसे निष्ठावान, संवेदनशील, समाज को जोड़ने वाले जुझारू ब्यक्ति व उनके समाज के प्रति समर्पित ब्यक्तित्व से वर्तमान पीढ़ी को सीखने की आवश्यकता हैं।


चंद्रगुप्त नाथ तिवारी
सुंदरपुर बरजा आरा(भोजपुर) बिहार

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