कवितासाहित्य

हजारों भूख से मरते हुओ को देख कर हमने

__कैलाश चंद साहू
बूंदी राजस्थान

हजारों भूख से मरते हुओ को देख कर हमने
सिंहासन की प्रशंसा में रंगा अखबार देखा है।।

गरीब भटकता रहता है अक्सर इंसाफ को
सिंहासन को हमने सुलगते लाचार देखा है।।

भूख से मरते हुए हमने बच्चो को देखा है
हजारों में हमने निभाते किरदार देखा है।।

होती है इंसानियत शर्मसार इस दुनिया में
भूख से तड़फते बच्चो को लाचार देखा है।।

तड़फते हुए इंसा को हमने मरते हुए देखा
जुल्म की इंतहा को करते आर पार देखा है।।

कैलाश चंद साहू
बूंदी राजस्थान

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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One Comment

  1. हमने 9 किताब लिखी है।
    अभी बाल कहानियों का लेखन जारी है।
    हिंदी एवं अंग्रेजी में लेखन जारी है।

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