साहित्य

हनुमान स्तुति

कुमकुम कुमारी “काव्याकृति”
जय -जय-जय गदाधारी,
हे पवनपुत्र बलशाली।
श्री राम दुलारे हनुमंता,
आ जाओ वीर भगवंता।
जय- जय-जय………..

अल्पकाल विद्या सब पायो,
अति विकट रूप धरायो।
रवि को अपने मुख में समायो,
अंजनी पुत्र बलबन्ता।
आ जाओ वीर भगवंता।
जय-जय-जय…………

त्राहि-त्राहि जग में छायो,
देवन मिलि तुम्हें मनायो।
छाड़ि दियो रवि कष्ट निवारो।
केसरी नंदन हनुमंता।
आ जाओ वीर भगवंता।
जय-जय-जय…………

रघुवर के तुम काज बनायो,
सत जोजन सिंधु पठायो।
मात सीता का पता लगायो,
मारुति नंदन हनुमंता।
आ जाओ वीर भगबंता।
जय-जय-जय………….

जाके अशोक वाटिका उजारो,
अक्षय कुमार को मार गिरायो।
लंका में तुम धूम लगायो,
वानर वीर हनुमंता।
आ जाओ वीर भगबंता।
जय-जय-जय……………

सुषेण वैध को लेन पठायो,
जाके संजीवनी बूटी लायो।
लक्ष्मण के तुम प्राण बचायो,
राम दूत हनुमंता।
आ जाओ वीर भगबंता।
जय-जय-जय…………

श्री चरणन में ध्यान लगायो,
सियाराम को हृदय में बिठायो।
श्री पति उर कंठ लगायो,
जय कपीस बलबन्ता।
आ जाओ वीर भगबंता।
जय-जय-जय………..

       कुमकुम कुमारी "काव्याकृति"
                मुंगेर, बिहार
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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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