कवितासाहित्य

हमारे दिल पर नहीं है काबू, डरते हैं

__कैलाश चंद साहू

हमारे दिल पर नहीं है काबू, डरते हैं
पल पल मुहब्बत में लोग हंसते हैं।।

किनारों से उनको क्या लेना देना
चांद सितारों में भी अक्ष देखते हैं।।

तेरे ख्वाब हम हर वक्त यूं ही देखते हैं
बार बार पलके खोल मुंदते रहते हैं।।

जो दिल के करीब हमे सदा ही पाते
हम राज दिल कभी नहीं खोलते हैं।।

आंसू बन जब वो अश्कों पर आते हैं
पुराने घाव भी हमारे यूं उभर आते हैं।।

रंग बदलते हैं वो गिरगिट की तरह
हम उनकी एक झलक को तरसे है।।

गर्दिश में सितारे उनके फिर भी जाने
जिंदगी में सदा का जहर घोलते है।।

कभी छलक आते हैं आंखो से आंसू
जब सराफत उनकी हम देखते हैं।।

कैलाश चंद साहू
बूंदी राजस्थान

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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