कवितासाहित्य

हमें छोडकर यूं न जाओ हुजूर

हमें छोड़कर यूँ न जाओ हुजूर ।
जो हुई है खता जरा तो बताओ।।

दिल हमारा यूं न जलाओ हुजूर।
मोहब्बत जो दिल में तो बताओ।।

नजरें तो हमसे भी मिलाओ हुजूर।
जो वादा किया उसको निभाओ।।

कुछ बातें नैनों से भी करो हुजूर।
दिल का आइना हमको दिखाओ।।

हमसे यूं छुपके न जाओ हुजूर।
नैनों ही नैनों में तुम बातें बताओ।।

अपने दिल का हाल बताओ हुजूर।
अपने नैना हमारे नैना से मिलाओ।।

राह में पलकें बिछाए बैठे हैं हुजूर।
खुद से ही नज़रों को मत छुपाओ।।

स्वरचित एवं मौलिक रचना

अनुराधा प्रियदर्शिनी
प्रयागराज उत्तर प्रदेश

100% LikesVS
0% Dislikes

Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button
error: Content is protected !!