साहित्य

हर शय शिक्षक देती जीने के सबक

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चाँद-सितारे
धरती और आकाश
नदी, जंगल, पहाड़, पर्वत
झरने और तालाब
नन्ही चींटी, विशाल हाथी
उड़ते पक्षी, रेंगते कीट
दृश्य हो या अदृश्य
कुदरत की हर एक शय
देती अनमोल ज्ञान
देखने और समझने अगर,
हो दिव्य दृष्टि तो
निराशा में भी छिपे होते
आशा के सबक
देते जीने की प्रेरणा
राह के कंकर-पत्थर भी अक्सर,
मकड़ी का जाला हो
या हो किसी चिड़िया का घोंसला
प्रकृति का हर रैन-बसेरा
अपने में छिपाये हुए है कोई रहस्य
उगता सूरज लाता जो सबेरा
कहता सुबह-सुबह
खुद को हर पल सक्रिय रखो
समय से हर काम करो
चिड़ियों का प्रातःकाल गूंजन
आलस्य छोड़ने का देता हमें सन्देश
उठो और निकल पड़ो
दाना-पानी की फिकर करो
सृष्टि की हर चीज़ करती हमसे बात
देखने का सकारात्मक नजरिया
कर देता दृढ़ आत्मविश्वास
हर लेता अवसाद
हर शय है एक शिक्षक
सीखे जिनसे जीवन के सबक
शिक्षक दिवस पर,
करो इनको भी नमन ।।
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© ® सुश्री इंदु सिंह ‘इंदुश्री’
नरसिंहपुर (म.प्र.)

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