कवितासाहित्य

हास्य कविता

सुषमा श्रीवास्तव

एक थे अफलातून, चले सफर को,
फँसे रात में वेटिंग रूम-देहरादून, नींद न आई रात भर, चूसें मच्छर खून।
मच्छर चूसें खून, सारी देह घायल कर डाली
उन्हें उड़ा ले ज़ाने की योजना बना डाली।
बच गए कैसे, यह बतलाएँ तुमको,
नीचे खटमल जी ने पकड़ रखा था उनको।
विकट हुआ घमासान, थके नहीं रणवीर ।
ऊपर मच्छर नोंचते, नीचे खटमल वीर।
नीचे खटमल वीर, जान की आफत थी आई,
फुसफुसाते जपें-“जै जै जै हनुमान गुसाईं।
इतने में ही खैर न थी, सोता इक सरदार चिल्लाया,
तूसी भजन करो तो, देखो बाहर जाओ भाया।
मेरी नींद खराब करै क्यूँ, कल रात से न हूँ सोया।
अफलातून का सफर रस्ते बिच रोया,
घर से भला कहीं न, ये समझ देर मेें होया।।
रचनाकार-
सुषमा श्रीवास्तव
मौलिक कृति
सर्वाधिकार सुरक्षित
उत्तराखंड।

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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