साहित्य

हिन्दी गौरव गाथा

सुखमिला अग्रवाल,’भूमिजा’


हिंदी गौरव गाथा है ,
मेरे भारत देश की,
घनी घनी छाँव में है पलती,
सुरक्षा समग्र परिवेश की ।

भारत की पल्लवित ऋचा,
गौरव गान सरल सरिता ,
वैज्ञानिक वेद भाषा,
सहज ज्ञान की है वनिता।

हिंद धरा जिसका उदगम ,
सुशोभित जिसका है कण कण,
जन जन के उर निवासिनी,
मधुर सरस निर्झर छल छल ।

अभिमान हमारा हिन्दी भाषा,
संस्कृति की है परिभाषा,
उज्ज्वल,अनुपम, समृद्धशाली,
सुदृढ राष्ट्र की है आशा।


सुखमिला अग्रवाल,’भूमिजा’
©स्वरचित एवं मौलिक

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