साहित्य

हिफाजत

निर्मलासिन्हा

 
हिफाजत मैं करूँ तेरी
अगर तु हो जाए मेरी
तुने अगर प्यार का शमा
जलाया है ।
तो उसे बुझने ना दूँ मैं कभी
हिफाजत मैं करूँ तेरी ।
अगर तु हो जाए मेरी
तेरी आँखे क्यो मुझे गमगीन लगें ।
अगर तु कहे तो इसमे कुछ मीठी यादों का दरिया बहा दूँ।
हिफाजत मैं करूँ तेरी
अगर तु हो जाए मेरी
नीम की गोली से भी कड़वी तेरी बोली लागे
अगर तु कहे तो तेरी सारी जिंदगी में शहद घोल दूँ।
ये बरसात अक्सर ही तुम्हारे ही आँखो के आँगन में क्यो होता हैं ।
अगर तु मिल जाए तो इसे हरा भरा उपवन कर दूँ ।
तुझसे जो मोहब्बत की हैं तो दुनिया को भी छोड़ दूँ
अगर तु कहे तो ये रिश्ते नाते क्या मैं अपना जिस्म भी छोड़ दूँ
हिफाजत मैं करूँ तेरी
अगर तु हो जाए मेरी ।
स्वरचित अप्रकाशित  मौलिक रचना निर्मला सिन्हा ग्राम जामरी डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़

50% LikesVS
50% Dislikes

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button
error: Content is protected !!