साहित्य

हे महर्षि वाल्मीकि! मेरा प्रणाम,शत शत प्रणाम!

डॉ.अनिल शर्मा ‘अनिल’

रामकथा से इस जग को
परिचित करवाकर धन्य हुए
श्री रामकथा लिखने वालों में
आप ही तो अग्रगण्य हुए।
मरा मरा रटते रटते भी
जपा प्रभु का राम नाम।
हे………..
प्रभु नाम जाप कर देता है
जीवन में कैसा परिवर्तन।
इसका उत्कृष्ट उदाहरण है,
महर्षि आपका ही जीवन।
लव कुश जन्मे,पले,बढ़े,
आश्रम सेवा में अविराम।
हे……
लव कुश ने रामकथा सुनकर,
कंठस्थ करी और किया गायन।
राजसभा में अयोध्या की,
गूंजी वाल्मीकि की रामायण।।
हो भाव विभोर,वह कथा सुनी
नयनों से अश्रु ढलकाए राम।
हे…..
डॉ.अनिल शर्मा ‘अनिल’
धामपुर उत्तर प्रदेश

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