साहित्य

हो रहे हो विदा , यह चमन छोड़कर

गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद

हो रहे हो विदा, यह चमन छोड़कर ।
आज के दिन हमसे, यह बोलकर।।
खुश रहो तुम सदा, मुस्कराते रहो।
अपने मुल्क से, रिश्ता तुम जोड़कर।।
हो रहे हो विदा——————-।।

अपने मकतब में , इस मकसद में ।
नहीं मुरझाये फूल ,किसी उलफत में।।
रहे आबाद यह , गुलशन कल भी ।
अपनी तालीम से , फूल यह सींचकर।।
हो रहे हो विदा——————-।।

किसी तुफान से , अपनी राह में।
सागर में उठती ,किसी हलचल से।।
डगमगाये न किश्ती, कदम नेकी से।
अपनी ज्योति से, दीपक यह रोशन कर ।।
हो रहे हो विदा——————।।

कौन है यहाँ पराया, सब अपने ही है।
अपने मीत है और सच्ची प्रीत है।।
नहीं टूटे यह डोर , कभी क्रोध में ।
अपनी खुशियां सभी , हमपे बरसाकर।।
हो रहे हो विदा—————-।।

रचनाकार एवं लेखक-
गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
ग्राम- ठूँसरा , पोस्ट- गजनपुरा
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)
मोबाईल नम्बर- 9571070847

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