साहित्य

हौसला

तरक्की की राह प्रशस्त है

राह सभी बाधाएं स्वयं ध्वस्त है

हौसला कर लिया एक बार

पक्का जीत का

बड़ी से बड़ी रुकावट भी

नहीं ठहरती फिर सामने

तोड़कर पहाड़ माझी ने

बनाया जैसे रास्ता

मिसाल दी दुनिया को

नहीं उम्मीद के आगे

कुछ भी ठहरता

जीत निश्चित हो चुकी है

तुम्हारे पहले ही कदम से

क्या खोया तुमने

इस जीवन में गम ना करो

पाने के लिए

पूरा जहान बाकी है अभी

उमा सिंह (झांसी)

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