कवितासाहित्य

हौसलों की उड़ान


रीमा सिन्हा(लखनऊ)

गिरेगा,लड़खायेगा,चोट खायेगा,
पंख फैलाएगा तो उड़ना भी सीख जायेगा।
यूँ तटों पर बैठकर कुछ ना कर पायेगा,
दरिया में छलांग लगा तैरना भी सीख जायेगा।
इरादे हों बुलंद तो कुछ भी कर जायेगा…

जो तोड़ रहे आज तेरे मनोबल को ,
वह खुद टूट जायेंगे एक दिन ।
हिम्मत का थाम ले दामन,
हो जायेगा का सब कुछ मुमकिन।
निशा के सपनों को दिन में साकार पायेगा,
इरादे हों बुलंद तो कुछ भी कर जायेगा…

हौसले जब उड़ान भरते हैं,
विशाल सुन्धु से भी राह निकलते हैं।
प्रस्तरों को चीरकर बहते हैं प्रपात,
कर ले तू इस बात को आत्मसात,
कोई ना तुझे रोक पायेगा।
इरादे हों बुलंद तो कुछ भी कर जायेगा…

जिस धरा का आधार तू,
पुकार रही कर उद्धार तू।
जिस व्योम ने तुझको सींचा है प्यार से,
तरस रहा सलिल कण को मनुजों के अत्याचार से।
उठा गांडीव तू अर्जुन सा वाण चलायेगा,
इरादे हों बुलंद तो कुछ भी कर जायेगा…


रीमा सिन्हा(लखनऊ)

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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