गजलसाहित्य

ग़जल

__डॉ रमेश कटारिया
पारस

हर तरफ़ पानी ही पानी चाहता हूँ
नदियों में फ़िर से जवानी चाहता हूँ

बाँध टूटे या कहीँ भूकंप आए
सुर्खिओं में इक कहानी चाहता हूँ

लब्ज वो जो तीर की मानिंद चुभे
लब्जो में ऐसी रवानी चाहता हूँ

उम्र भर उतरे नहीँ जिसका नशा
चीज़ इक ऐसी पिलानी चाहता हूँ

दिल हमारा भर गया अब दोस्तों से
अब दुश्मनों की मेहरबानी चाहता हूँ

देखते ही जान जाएँ सब लोग पारस
उसकी इक ऐसी निशानी चाहता हूँ

डॉ रमेश कटारिया
पारस

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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