कवितासाहित्य

ग़ज़ल

__कुमारी गुड़िया गौतम

2122 2122 2122 212
ख़ूबसूरत सी ग़ज़ल कोई सुनाया कीजिये,
वक्त है ये कीमती इसको न जाया कीजिये।

है बड़ाी अनमोल अपनी ज़िदंगी समझो ज़रा,
इसको जैसे भी चाहो बशर सजाया कीजिये।

लोग बुरे हैं पर आप जहर न बरसाया कीजिए,
अपनी बात के लिए यो न चिल्लाया किजिए।

अपनों को छोटी बात पर न रूलाया किजिए,
पैसे के लिए रिश्तों का न मौल लगाया कीजिए।

हजार होंगे चाहने वाले यो न तरसाया किजिए,
जरा सी बात पर अपनों को न पराया किजिए।

कभी रोकर भी जीवन में मुस्कुराया कीजिए,
कभी अपने कुछ गम हमें भी सुनाया कीजिए।


कुमारी गुड़िया गौतम

(जलगांव) महाराष्ट्र

100% LikesVS
0% Dislikes

Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button
error: Content is protected !!