साहित्य

14/02/2022- भगत सिंह

__गीता देवी

कफन बांध कर निकल पड़ा,
केसरिया रंग में रंगने वाला।
नाम है उसका भगत सिंह,
अब नहीं पीछे हटने वाला।।

थोड़ी पढ़ाई थी नौजवान ने,
भारत की आजादी के लिए।
कारावास के करे कष्ट सहन,
हमको सुख दिलाने के लिए।।

प्यार किया वतन से इतना,
मौत को अपनी दुल्हन बनाया।
बांधा। नहीं सर पर सेहरा,
कफन को स्व तन पर सजाया।।

प्रण लिया था वीर सपूत ने,
भारत मां को मुक्त कराने का।
हिंदुस्तान को जकडे़ बैठे थे,
फिरंगियों को मार भगाने का।।

संग लिया था अपने यारों के,
परचम सबको दिखलाना था।
दुश्मन के सीने पर तिरंगा,
ध्वज अपना फहराना था।।

कथन यह मेरी जुबानी है।
यह वीरता की कहानी है।
आजादी की रवानी है।
भगत सिंह को सलामी है।।

गीता देवी
औरैया उत्तर प्रदेश

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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