साहित्य

आस में विश्वास

सरिता गुप्ता

बुरे वक़्त के बाद भी यारो
अच्छा समय तो आता है
अगर ढला है शाम में सूरज
सुबहा फिर उग आता है।

सुख-दुख जीवन के साथी हैं
इनका अद्भुत नाता है
सुख दुख को देकर जाता है
दुख सुख को ले जाता है।

जाने क्या अनबन दोनों में
साथ नहीं रुक पाते हैं
आंँख-मिचौली रहें खेलते
संग में रह नहीं पाते हैं।

रखो ज़रा सा और धैर्य
रात ग़मों की बीतेगी
भरी हुई अवसाद की गागर
एक दिन बिल्कुल रीतेगी।

पतझड़ में माना कि पत्ते
टूट-टूट कर गिरते हैं।
मौसम खुशियों का जब आता
फूल चमन में खिलते हैं।

मचा हुआ जो मौत का तांडव
हर पहिया एक दिन रुकता है।
करो भाव से नित्य प्रार्थना
भक्त समक्ष प्रभु झुकता है।

कितनी लोगे और परीक्षा
आकर प्रभु बताओ ना
बहुत बह गया नीर नयन से
कुछ खुशियांँ दिखलाओ ना।

कर्ण बधिर से हुए हमारे
सुन सुनकर ये रोज विलाप।
हाथ जोड़ करते हैं विनती
अपना चक्र चलाओ आप।

जाने कितने दैत्यों को गिरिधर
मौत के घाट उतारा है
करो करोना का कुछ अब तो
मानव मानव हारा है।

हुई दुर्दशा मेरे देश की
दहशत में हर सांँस है।
तेरे बिना न कोई सहारा
तू इस जग की आस है।।

सरिता गुप्ता
दिल्ली

100% LikesVS
0% Dislikes

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!