साहित्य

आल्हा छंद

श्रद्धेय भीखारी ठाकुरजी के सादर 🙏🏿 नमन

अमरेन्द्र

सुमिरीं मातु सारदे पंचो,
संग संग शंभू के नाम।
जय भोजपुरी भइया बहिनी,
सीस नवा सादर परनाम।।

ध्यान लगाकरि सुन रे बंदे,
आजु सुनाईं आल्हा गान।
मलिक भिखारी नामी मनई,
जिनि के जग में नाम जहान।
मगध राज सारन जनपद में,
कुतुबुपुर एक नामी गाँव।
मास दिसम्बर साल सतासी,
जने भिखारी ओही ठाँव।
दलसिड़्गार बाप कविवर के,
ठाकुर टैटिल जाति हजाम।
जय भोजपुरी भइया बहिनी,
सीस नवा सादर परनाम।।

बचपन में घनघोर गरीबी,
सुते भिखारी खाली पेट।
छूरा कइची खूब चलइलनि,
तनिक मनिक विद्या से भेट।
सोरह में घर तजि के गइलनि,
खड़गपुर प श्चिमी बंगाल।
निज पेसा के धारन कइलनि,
आगे के अब सुन लीं हाल।
मन ना लागल धन दउलत में,
हिया बसइलनि हरि के नाम।
जय भोजपुरी भइया बहिनी,
सीस नवा सादर परनाम।।

जइसे जइसे बढ़ल उमरिया,
भइल भक्ति के भाव सवार।
लागल मनवा नाच गान में,
लोक रीति के बहल बयार।
सहर तजि देहात में अइलन,
बन्हल आपन बड़हन गोल।
गीत भजन संगीत बनइलनि,
सुर बिदेसिया बनल बोल।
साधक बनि के गाँव नगर में,
जग कुरीति के कइलें आम।
जय भोजपुरी भइया बहिनी,
सीस नवा सादर परनाम।।

भरल भाव पर नाम भिखारी,
बात के काड़ा भीतर लोच।
दुनिया में परसीधी पइलन,
सादा जीवन ऊँच्चा सोच।
सुन्दर पद बिरहा बहार के,
बेटि-बेचवा गबरघिचोर।
नाटक बा बिधवा बिलाप पर,
जेकर चरचा चारो ओर।
भाई बिरोध ननद भउजइया,
पढ़े आजु तक आम अवाम।
जय भोजपुरी भइया बहिनी,
सीस नवा सादर परनाम।।

सान बढ़लइनि भोजपुरी के,
दुनिया में कइले परचार।
फिजी माॅरीशस गुयाना में,
बहल जोर भजपुरी बयार।
आरा बलिया जनपद छपरा,
मउ देवरिया में जैकार।
गोरखपुर नैपाल बनारस,
जानै इनिके गाँव जवार।
भोजपुरी के अलख जगावे,
गइलरहनि ई सुरीनाम।।
जय भोजपुरी बहिनी भइया,
सीस नवा सादर परनाम।।

आडम्बर के परम बिरोधी,
बोल चाल गजबे अंदाज।
कइलनि चोट बेइमानन पर,
जानै इनिके सकल समान।
जात पात से ऊपर होला,
ज्ञान गुन के मान सम्मान।
धन दउलत कछु संग न जाला,
रहि जाला अमर पहचान।
साल तीरासी पार लगल तब
चलि गइले ऊ हरि के धाम।
जय भोजपुरी भइया बहिनी,
सीस नवा सादर परनाम।।

अमरेन्द्र
आरा भोजपुर बिहार

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