साहित्य

चन्द्र प्रकाश गौतम की कलम से

गीत


प्यार उनका मिले दर्द सारे सहेगें,
कहीं भी रहेंगे उन्हीं के रहेंगे ।

आंखों का नूर आंखों से दूर,
मोहब्बत में ऐसे बहुत मजबूर,
अधूरी मोहब्बत अधूरे रहेंगे ।

मधुर मिलन को मन चाहता है,
सच्ची मोहब्बत तपन चाहता है,
तड़पता हूं बहुत तड़पते रहेंगे ।

जहां दिल से दिल धड़कने हैं मिली,
मोहम्मद वहीं से पली है बड़ी,
खिलते कलियों पर भौरा भटकते रहेंगे ।

ओ भूल जाएं ये उनकी है मर्जी,
चाहत से अपने यही एक अर्जी,
ये दिल है उन्हीं का दीवाने रहेंगे ।

जिसे फूल सा सवारता रहा मैं,
जिसे दिल से पुकारता रहा मैं,
उन्हीं के मोहब्बत में खोए रहेंगे ।

कहीं भी रहेंगे उन्हीं के रहेंगे,
प्यार उनका मिले दर्द सारे सहेगें ।

गीत

तन्हा आज कल हूँ मैं ।
कभी किसी के सुबह कभी किसी के शाम थे ।
घंटों घाटों मस्ती के नगर में घूमे खुलेआम थे ।
सब झांक चले जाते हैं ज़िन्दा ताजमहल हूँ मैं

भीग भीग कर सावन में साथ बिताए शाम है ।
तोड़ तोड़ कर बारिश में उनको खिलाएं आम है ।
इन यादों के सागर में नयन से नीर सजल हूँ मैं ।

प्यार तुम्हारा साथ हमारा साथ तुम्हारा प्यार थे हम ।
प्यार के राही एक डगर थी दो दिल एक जान थे हम ।
लोहे जैसा ठोस रह गई खुद रखा तरल हूँ मैं ।

सुबह तुम्ही से शाम तुम्हें से,
कवि ह्रदय अंजाम तुम्हीं से ।
खुद को उलझन में तुम डाली
बहता नीर सरल हूँ मैं ।

वो थी मेरे दिल की रानी,
साथ अधूरा बनी कहानी
प्यार में उनके लिखता पड़ता,
प्यार में उनके गजल हूँ मैं ।

ग़ज़ल

मोहब्बत में टकरार अभी बाकी है,
जीत कैसे हो हार अभी बाकी है ।

हजारों कोशिशें हुईं मुझे भूलाने की,
प्यार के रिश्ते का ऐतबार अभी बाकी है ।

हाल भी पुछा जाता है मेरा किसी और से,
मिलन की चाह बे करार होना बाकी है ।

पहले प्यार को भूलना मुश्किल है,
अंधेरे में उम्मीद की ज्योति अभी बाकी है ।

मोहब्बत में दो होकर भी हम एक थे,
कोई अलग कर दें वो असरार अभी बाकी है ।

दोनों बेचैन है एक दूजे की चाह में,
करार अभी बाकी है इंतजार अभी बाकी है ।

हजारों कोशिशें हुईं मुझे भूलाने की,
प्यार के रिश्ते का ऐतबार अभी बाकी है ।
चन्द्र प्रकाश गौतम
मीरजापुर उत्तर प्रदेश, भारत
8400220742

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