साहित्य

डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव की कलम से

मास्क लगाएं दोनों टीके भी लगें जरूर

ये कोरोना अभी थमा नहीं,
हाँ कुछ मंद पड़ा है जरूर।

लापरवाही ये पड़े ना भारी,
रखना सभी ख्याल जरूर।

आरटीपीसीआर रिपोर्ट है,
भले निगेटिव आई जरूर।

लक्षण मिलते दिखते रहते,
सावधान इससे रहें जरूर।

अभी तो ये आँख मिचौली,
थर्ड वेब ये आये गी जरूर।

मास्क लगाना है बिलकुल,
दोनों टीके लगवायें जरूर।

कोई ढील भले मिल जाये,
पालन ये प्रोटोकाल जरूर।

कोविड19 ऐसी है बीमारी,
सभी प्रभावित होते जरूर।

जबतक इसकी नहीं दवाई,
तबतक रखें कड़ाई जरूर।

रिसर्च कर रहा है वैज्ञानिक,
विश्वास होगा सफल जरूर।

अभीतो केवल आप बचे हैं,
ये बच्चे भी सब बचें जरूर।

हम लड़ें कोरोना से हरदम,
देश से भगाना इसे जरूर।

“भूजल सम्पदा महत्त्व”- जल व्यर्थ न बहायें


(जल ही जीवन है-अगली पीढ़ी हेतु जल बचाएँ)


कुएं में ज्यादा मीठा जल होता,
जिसे लोग इनारा भी कहते हैं।

                 वर्षा ऋतु में बरसता है जो जल,
                 तीन रूप में यह विभाजन होता।

कुछ तो बह नदी समुद्र में जाता,
कुछ वाष्प बन नभ में उड़ जाता।

                  कुछ अवशोषित होता है धरती में, 
                  वही तो भूजल सम्पदा कहलाता।

ट्यूबेल बोरिंग एवं यह हैण्ड पम्प,
सब मर्सिबल मोटर लगाते पम्प।

                 भूजल दोहन करते रहते हैं हमसब,
                 जल सरंक्षण नहीं करते हैं हमसब।

जल ही से तो हमारा जीवन है,
अमृत जल को ना व्यर्थ बहायें।

                दुनिया में पानी बिना है सब सून,
                पानी बोतल में बिके मूल्य है दून।

जल बिन केवल मीन न प्यासी,
जल का प्यासा है सारा संसार।

                जल ही जीवन होता है सब का,
                जल बिना यह जीवन है बेकार।

पशु पक्षी मानव कीट पतंगे सब,
जल बिन ये हो जाते हैं लाचार।

                जल बिन होय न खेती किसानी,
                जल है सभी जीवन का आधार।

भूजल सम्पदा का महत्त्व समझें,
वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम समझें।

                जल बिन कोई न भोजन पकता,
                जल बिन होय ना पूजा संस्कार।

जलबिन होय न शरीर की शुद्धि,
किसी मृत का न हो दाह संस्कार।

               सूखी नदियां नहीं किसी काम की,
               जल ही नहीं तो नदी है वो बेकार।

सागर के गहराई की शोभा है जल,
वर्ना शील ह्वेल बौलरस हैं बेकार।

              "भूजल संपदा महत्त्व"का है आगाज,
               जल अमृत है सरंक्षित करना आज।

कल का भविष्य होगा तभी सुनहरा,
जब हम सब बेकार न बहने दें जल।

              बूँद बूँद भी बहेगा जल तो कम होगा,
              दिखे खुली यदि टोंटी बन्द करो नल।

यह काम एक का नहीं है ये केवल,
बेकार कभी न बहाओ अमृत जल।

                "भूजल संपदा महत्त्व" तभी सार्थक,
                 संकल्प अभी लें बचायेंगें हम जल।

जल से ही वन जल से ही उपवन,
जल ही से है हमारा ये मानव तन।

               ये जल जीवन के लिए है मूल्यवान,
               हम क्यों ना बनें जल के कदरदान।

जल संचयन संग्रहण संरक्षण करें,
भूजल संपदा रक्षा जागरूक करें।

गुरु की कक्षा में स्वयं पढ़े आ कर नारायण


गुरु शिक्षा संस्कार देते,ये भविष्य सुन्दर बनाएं।
गुरु पूर्णिमा पर हम,चरणों में यह शीश झुकाएं।

जिसकी कक्षा में स्वयं पढें,आकर के नारायण।
गुरु का अच्छा भाग्य है,गीता देखें या रामायण।

संदीपन ऋषि से पढ़े हैं,द्वापर में अवतारी कृष्ण।
16 हजार गोपियों वाले, नटवर नागर श्री कृष्ण।

गुरु वशिष्ठ व विश्वामित्र से,पढ़े हैं अवतारी राम।
चारोभाई संग गुरुकुल,जाके त्रेता में ये श्री राम।

ये दोनों ही धरती पर जन्मे,विष्णु के हैं अवतार।
मानव तन धर कर आये, लीला किये अपरंपार।

जब-2 घड़ा भरा पाप से,व बढ़ा धरती का भार।
तब-2प्रभु अवतार लिये,कष्टों से किये हैं उद्धार।

कृष्ण ने कंस को मारा,श्री राम ने रावण है मारा।
मानव तनधारी हुए तभी,शिक्षादीक्षा लिए सारा।

ऋषियों से ज्ञान प्राप्त कर, गुरु का मान बढ़ाया।
जीवन में शिक्षा बहुत जरुरी,यह सन्देश पढ़ाया।

सौभाग्य बढ़ा गुरुकुल का,नर ही थे ये नारायण।
गुरु की कक्षा में स्वयं पढ़े,पृथ्वी पे आ नारायण।

सब को गुरु पूर्णिमा,की बहुत-2 हार्दिक बधाई।
शत-2नमन है गुरु,गुरुपर्व है शुभकामनाएं भाई।

डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव
वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.
इंटरनेशनल एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर-नार्थ इंडिया
एलायन्स क्लब्स इंटरनेशनल,कोलकाता, इंडिया

50% LikesVS
50% Dislikes

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!