साहित्य

डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव की कलम से

सच की होती जीत सच्चाई से ना भागें


सच से कभी ना भागें,इसे करें स्वीकार।
झूठ कपट छल ईर्ष्या,त्यागो ये मेरे यार।

कन्धे पर है बोझ तुम्हारे,तुम्हें उठाना है।
भागेंगे सच से तो,कहाँ फ़र्ज निभाना है।

लोभ मोह माया के,चक्कर में भाग रहा।
जीवन की सच्चाई से,क्यों यूँ भाग रहा।

सच से जितना भागें,व झूठा पर्दा डालें।
सच कभी छुपे न,कितने भी झूठा पालें।

सच्चाई से भाग नहीं,सकता है कोई भी।
अंततः स्वीकार सभी,को करना पड़ता।

पाप भी करने वाले,कार्य गलत है जानें।
फिर भी इस सच्चाई,को क्यों नहीं मानें।

बुरे कर्म के बुरे नतीजे,ये तो सभी जानें।
सच्चाई से भागे फिरते,बुरे कर्म ही ठाने।

सच की होती जीत सदा,सच से न भागें।
ईश्वर है सब देख रहा,आँखे खोलें जागें।

धन दौलत के वास्ते ईमान कभी न खोयें।
ऐसा ना हो जन्म भर,इसके पीछे ही रोयें।

कर्म कसौटी होती है,जो बने उसे निभायें।
फर्ज निभाना सच्चाई है,उससे न घबरायें।

कारगिल विजय दिवस की सब को बहुत बधाई

हे कारगिल के शूर वीर,शत शत है नमन तुम्हारा।
भारत माता के लाल तुम्हीं,है गर्वित भारत सारा।

कारगिल विजय दिवस की,सब को बहुत बधाई।
अमर शहीदों ने अपनी जानें,देकर विजय है पाई।

भारत माता की रक्षा में,कर दिये प्राण न्योछावर।
उन वीर सपूतों को श्रद्धा,के फूल समर्पित सादर।

उस वक्त तो सेना में हर,साजोसामान रहा अधूरा।
बोफोर्स तोपों ने गोला,बारूद बरसाया था पूरा।

कारगिल संघर्ष में गोला,बारूद से लेकर ये राडार।
दूसरे देशों पर निर्भरता,सैटेलाइट तस्वीरें हथियार।

भारत अब मजबूत हुआहै,किसी पर नअब निर्भर।
उन्नत हथियार सर्विलेंस तंत्रमें,काफी आत्मनिर्भर।

कारगिल युद्ध बाद तीनों,सेनाओं की शक्ति बढ़ाई।
रडार मिसाइलें चापर्स टैंक,व फाइटर प्लेन बढ़ाई।

अब भारत हर मौसम में,दुश्मन से लड़ने में सक्षम।
सेनाके आधुनिकीकरण से,साजोसामान में सक्षम।

कोई दुश्मन इस भारत को,आँख दिखा न सकता।
पलभर में तोपें,युद्धक विमान उन्हें सीख देसकता।

येहैआधुनिक भारत,इसको डर न किसी का भाई।
जो चाहेगा आँख दिखाना,उसकी आँखें गई भाई।

गोरी में देखो आ गई यौवन की तरुणाई

प्रीति की पायल जब से बंध गई मेरे पांव।
रह-रह कर लगे उछलने मेरे गोरे-गोरे पांव।

उमर हो गयी है अब मेरी पूरे सोलह साल।
गालों पर लाली है छाई होठ हो गये लाल।

दिल वश में है ही नहीं ये जाने है पूरा गाँव।
भटक रहा मेरा मन तुम बैठे हो किस ठाँव।

नजर ढूँढ़ती प्रियतम को कहाँ छुपे हो प्रेमी।
आओ तुझे गले लगाऊं मिल जायें दो प्रेमी।

मन डोले मेरा तन उछले तड़प रहा है दिल।
ऐसे मुझे सताओ न तुम जल्दी आके मिल।

रह-रह के हो जाता मन तेरे लिए ये विह्वल।
याद में बहते मेरी आँखों से आँसू अविरल।

नहीं संभलती है गोरी से यौवन की तरुणाई।
रह-रह कर आती रहती है मुझको अंगड़ाई।

एक दूजे के हो जायें डाल गले फूलों के हार।
देखो कैसे बहती है ये पिया मिलन की बयार।

मेरे साजन तुम हो मेरे सपनों के राजकुमार।
तेरे मेरे प्रेम मिलन से लगे बरसने नित प्यार।

धक-धक करते ये दिल मेरा खाये हिचकोले।
बहुत हो गया अब हम तुम एक दूजे के होलें।

महाकाल भोले शंकर ही कोरोना को मारेंगें


पाकर वरदान भस्मासुर ने,अपना आतंक मचाया।
भस्मासुर को शंकर जी ने, किया भस्म और मारा।

इस वैश्विक महामारी को भी,केवल वही तो टारेंगे।
महाकाल भोले शंकर ही,ये कोरोना को भी मारेंगे।

बहुतबड़ा ये काल बना है,जीवन सबका खतरे में।
नौकरी व्यापार दिहाड़ी,सब कुछ पड़ा है खतरे में।

रोजी रोटी के लाले पड़ गये,बंद होगये सब काम।
मजदूरों का तो बुरा हाल है,कहीं नहीं कोई काम।

शासन सरकारें सहयोग देरहीं,कोई न भूखा सोये।
मानवता के सभी पुजारी,कर रहे हैं सेवा जो होये।

कच्चा पक्का दोनों राशन,नित्य ही गरीबों में बाँटें।
मरे भूखसे न कोई नर सेवा है,दुःख नारायण छांटें।

किसान न होते धरती पर,तो कहाँ अन्न फिर पाते।
अन्नसब्जी को लोग तरसते,सोचो फिर क्या खाते।

कोरोना वारियर्स केही जैसे,इनका भी हो सम्मान।
भूखों सब मर जाते यदि,ना होते मेहनती किसान।

सब है कृपा प्रभू की भइया, रक्षक है कृपानिधान।
संकट की इस घड़ी सहायक, केवल एक किसान।

बहुत सब्र करलिया,सह लिया पूरा-2 लाकडाउन।
टारो अब प्रकोप इसका,मृत्युदर भी तो हो डाउन।

जैसे शिवतांडव करके प्रभु,हर अहंकारी को मारे।
वैसेही कोविड19 को मारें,दिखे ना किसी के द्वारे।

ये महाकाल भोले शंकर ही,कोरोना को भी मारेंगे।
इस वैश्विक बीमारी को,केवल वह ही जगसे टारेंगे।

श्रीराम मानस का भव्य श्रीराम मंदिर-अयोध्या

इस शताब्दी का सब से,बड़ा पावन यही अनुष्ठान।
अयोध्या जी में होरहा,सुन्दर भव्य मंदिर निर्माण।।

130करोड़ देशवासियों,के लिए अहम दिन होगा।
राम काज हित देश ने,मर्यादा पालन किया होगा।।

कितने लंबे संघर्ष व साधना,की ये सिद्धि हुयी है।
हिन्दू देशवासियों के गौरव,में यह संवृद्धि हुयी है।।

भव्य मंदिर में राम लला जी,अब होंगे विराजमान।
विश्व पटल पर श्रीराम मंदिर,का सदा रहेगा मान।।

राम हिन्दू संस्कृति का,एक संस्कार एवं आधार है।
राम-2लिख पत्थर पे,वानर सेना समुद्र के पार है।।

पूरी दुनिया के भारत भक्तों,राम भक्तों को बधाई।
आज ख़ुशी के वो क्षण पल,आया है ये सुखदाई।।

घर-घर गांव-गांव से मंदिर,बनने को आईं शिलायें।
रामकाज कीन्हे बिना,मोहिं कहाँ विश्राम दिलायें।।

श्रीराम सा नीतिवान,कुशल शासक हुआ न कोई।
श्रीराम प्रजा से एक सम,रखते प्रेम चाहे हो कोई।।

श्रीराम ने ही हमें सिखाया,भय बिन होय ना प्रीति।
अच्छे कर्म का पुरस्कार,बुरे कर्म में दंड की रीति।।

इस ऐतिहासिक पल का,यह मेरी रचना साक्षी है।
श्रीराम मंदिर निर्माण,समपर्ण निधि भी साक्षी है।।

जय श्रीराम जै श्रीराम,जै श्रीराम जयजय श्रीराम।
जै हनुमत जै हनुमान,जै जै जै जै जय सियाराम।।

डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव
वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.
जिलाध्यक्ष:अखिल भारतीय कायस्थ महासभा
प्रतापगढ़,उत्तर प्रदेश
इंटरनेशनल एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर-नार्थ इंडिया
एलायन्स क्लब्स इंटरनेशनल,कोलकाता,प.बंगाल
संपर्क : 9415350596

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