साहित्य

गजल

राजेश प्रजापति

एक समन्दर सारे जहा की प्यास बुझा सकता है
एक समन्दर की प्यास कोई बुझाएगा क्या ।

होने को तो हजारो तारो से एक गगन रौशन हो सकता है
सूरज की तरहा रौशनी करके कोई दिखाएगा क्या।

और,होगी रफ्तार तेरी हवा से भी जादा तेज
वक्त से तेज चलकर कोई दिखाएगा क्या ।

माना तुम अकेले सारा बाजार खरीद सकते हो
एक बाप की तरहा खरीदार बनके कोई दिखाएगा क्या ।

भरी बाजार मे एक बाप कौडीयो के भाओ बिक सकता है
बेटा कौडीयो मे बिक कर दिखाएगा क्या।

हां हो तुम बादशाह फिल्मी एक्टिंग के
मां से अच्छा किरदार कोई निबाहेगा क्या।

राजेश प्रजापति (बरेली )
मो-7500700862

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