साहित्य

गजल

डा 0 प्रमोद शर्मा प्रेम

मै दर्दे दिल यूँ……मिटाने चला हूँ
दिये आंधियो ..में जलाने चला हूँ!1

सफर जिंदगी का आसां नहीं है
सभी मुश्किलों को हटाने चला हूँ! 2

लबों पे सजाईअपनी ही गजलें
यारों सभी को……सुनाने चला हूँ! 3

बहुत गम है झेले ..मैंने जहाँ मे
थोड़ी सी खुशियाँ .जुटाने चला हूँ! 4

चलो साथ मेरे अच्छा करें कुछ
कीमत वफा की …बढाने चला हूँ! 5

सूना सा ..आंगन जो दिख रहा है
गुलाबों की कलमें लगाने चला हूँ! 6

मोहब्बत भरा प्रेम सारा जहाँ हो
सबको मोहब्बत सिखाने चला हूँ! 7

डा0 प्रमोद शर्मा प्रेम

नजीबाबाद बिजनौर

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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