साहित्य

गजल

डा 0 प्रमोद शर्मा प्रेम

मै दर्दे दिल यूँ……मिटाने चला हूँ
दिये आंधियो ..में जलाने चला हूँ!1

सफर जिंदगी का आसां नहीं है
सभी मुश्किलों को हटाने चला हूँ! 2

लबों पे सजाईअपनी ही गजलें
यारों सभी को……सुनाने चला हूँ! 3

बहुत गम है झेले ..मैंने जहाँ मे
थोड़ी सी खुशियाँ .जुटाने चला हूँ! 4

चलो साथ मेरे अच्छा करें कुछ
कीमत वफा की …बढाने चला हूँ! 5

सूना सा ..आंगन जो दिख रहा है
गुलाबों की कलमें लगाने चला हूँ! 6

मोहब्बत भरा प्रेम सारा जहाँ हो
सबको मोहब्बत सिखाने चला हूँ! 7

डा0 प्रमोद शर्मा प्रेम

नजीबाबाद बिजनौर

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