साहित्य

गीत तेरे प्यार का ?

डाः मलय तिवारी


तुम गये तो बीत गया, मौसम बहार का ।
गुन गुना रहे हैं मगर, गीत तेरे प्यार का।।
छुप छुप के मिलना तेरा, सपनों में आना,
शरमा कर बाहों में आके, मुसकराना,
सूख रहा जूरे में ,फूल हरसिंगार का।।
गुन गुना रहे हैं।। =========
मेंहदी लगे हाथों में, कंगन खनकना,
आहिस्ता से पावों में, पायल छनकना,
यादों को बींध गया स्वर, मन के तार का।।
गुन गुना रहे हैं। ==========
रूप का अक्श तेरे, दरपन में उभरे,
खुशबू बदन की तेरे, उपवन में बिखरे,
“मलय”खेल प्रेम में, होता आर पार का।।
गुन गुना रहे हैं।। =========
डाः मलय तिवारी बदलापुर

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