साहित्य

“गुरु ज्ञान है”

 कु.आरती सिरसाट

गुरु ज्ञान है……!
गुरु ही शिक्षा की पहचान है……!!
हम तो बिन पंख के पंछी से……!!!
गुरु ही तो हमारे पंखों की उड़ान है……!!!!

कोई कहें कनक को धन……!
कोई कहें सौंदर्य को धन……!!
मिल जायें गुरु धन जिसे……!!!
जगत में उससें कोई नही धनवान है……!!!!

गुरु मान है……!
गुरु ही कठिन प्रश्नों का समाधान है……!!
हौसला उनसें ही तो मिलता है……!!!
उनसें ही तो खुद पर हमें अभिमान है……!!!!

गुरु कृपा जो पा लियें……!
शिक्षा सार बसायें जो हृदय में……!!
गुरु है जिसके ध्यान में……!!!
बन गयें वो विदवान है……!!!!

गुरु महान है……!
गुरु ही से खुद पर स्वभिमान है……!!
गुरु की राह पर जो चलें……!!!
पाये कई उन्होंने सम्मान है……!!!!

मिल जायें हर वस्तु मोल से……!
मिलें न शिक्षा कोई तोल से……!!
बिन गुरु कहा से शिक्षा पाओगे……!!!
बिन गुरु कहा ज्ञान है……!!!!

गुरु ज्ञान है……!
गुरु ही शिक्षा की पहचान है……!!
हम तो बिन पंख के पंछी से……!!!
गुरु ही तो हमारे पंखों की उड़ान है……!!!!

       कु.आरती सिरसाट
   बुरहानपुर मध्यप्रदेश
मौलिक एवं स्वरचित

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