साहित्य

गुरू की महिमा

कमलेश मुद्ग्ल

जीवन में जब आते हैं गुरू

होता तभी से जीवन शुरू

आते ही उनके मिलता हमें ज्ञान

वो मिटा देते हैं हमारा अज्ञान

घिरे रहते थे एक भंवर में

मिलती नहीं थी कोई

डगर जीवन में

आते ही उनके जिन्दगी

चल पड़ी है संवर के

चरणों में गुरू के नवाये हम माथ

हमें मिले जो शिक्षा संस्कार

उन पर ही चलते हैं आज

गुरू नाम की महिमा है साथ

प्रथम गुरू हैं माता- पिता

दो उनको पूर्ण सम्मान

बिना उनके हम

कुछ भी नहीं

आशीष से उनके

संभव सब हो जाता

कमलेश मुद्ग्ल (दिल्ली)

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