साहित्य

गुरु

अतुल पाठक धैर्य


नवजीवन देता है सबको,

नवशक्ति का आह्वान करे।

जो झुक जाता गुरु के आगे,

वह गुरु ही सबका उद्धार करे।

मार्गदर्शक वो गुरु शिक्षक ही,

जीवन की राह दिखाता है।

शिक्षा देकर हमको अपने,

जीवन में आगे बढ़ाता है।

जो जीवन के मझदार में फँसता,

उसका भी हो जाता उद्धार सदा।

जो गुरु चरणों की शरण में आता,

उसका ही होता बेड़ा पार सदा।

जटिल से जटिल समस्या का 

गुरु ढूंढे तुरंत निदान,

विद्या सा जग में नहीं

दूजा कोई महादान।

सर्व समाज और राष्ट्र प्रणेता,

कोई और नहीं गुरु शिक्षक ही होता।

गुरु की महिमा है अपरम्पार,

गुरु दीक्षा पाकर बढ़ता है उन्नत शिक्षा का संसार।

शिक्षा की अलख जगाकर वो,

पुरानी नीति कुरीति मिटाता रहा।

बिना शिक्षा के तमस फैला जहाँ पहले,

अब वहाँ शिक्षादीप का ज्ञानप्रकाश उजाला रहा।
रचनाकार-अतुल पाठक धैर्य

जनपद हाथरस(उत्तर प्रदेश)
मौलिक/स्वरचित कविता

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